भारत में आदिवासियों के कई जातियों में संथाल जाति एक ऐसी जनजाति है जिसकी आबादी अनुसूचित जनजाति के रूप में इस देश में सबसे अधिक है . सदियो से ही इस जनजाति के लोगों का पहाडों और जंगलों से इनका पुराना नाता रहा है. आदिवासी मूल रूप से प्रकृतिक पूजक होते हैं.ये जाति अमन पसंद जाति है और इनकी अपनी अलग ही रीति रिवाज है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है या एक तरह से कहा जाये ये अपने समाज और समाज में होने वाले नियम कायदे अपने नए पीढ़ी को मौखिक रूप से सिखाया जाता है.
Monday, 9 May 2016
संथाली लेखक और उनकी लिखी किताबें
भारत में जनजातिय भाषाओ में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा संथाल भाषा है और इस भाषा में बहुत सारे साहित्यक रचनाऐ प्रकाशित हुई.
पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा लिखी गई किताबें
1.बिदु चन्दन (ड्रामा)
2.दाड़े गे धोन (ड्रामा)
3.खेरवाल वीर (ड्रामा)
4.एलखा पोतोब (प्रथमिक गणित)
5.हितल (संथाली गीत)
6.रोनोर(संथाली व्याकरण )
2.दाड़े गे धोन (ड्रामा)
3.खेरवाल वीर (ड्रामा)
4.एलखा पोतोब (प्रथमिक गणित)
5.हितल (संथाली गीत)
6.रोनोर(संथाली व्याकरण )
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