Monday, 9 May 2016

संथाल समाज और उनके रीति रिवाज

भारत में आदिवासियों के कई जातियों में संथाल जाति एक ऐसी जनजाति है जिसकी आबादी अनुसूचित जनजाति के रूप में इस देश में सबसे अधिक है . सदियो से ही  इस जनजाति  के  लोगों का पहाडों और जंगलों से इनका पुराना नाता रहा है. आदिवासी मूल रूप से प्रकृतिक पूजक होते हैं.ये जाति अमन पसंद जाति है और इनकी अपनी अलग ही रीति रिवाज है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है या एक तरह से कहा जाये ये अपने समाज और समाज में होने वाले नियम कायदे अपने नए पीढ़ी को मौखिक रूप से सिखाया जाता है.

संथाली लेखक और उनकी लिखी किताबें

भारत में जनजातिय भाषाओ में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा संथाल भाषा है और इस भाषा में बहुत सारे साहित्यक रचनाऐ प्रकाशित हुई. 
पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा लिखी गई किताबें 
1.बिदु चन्दन (ड्रामा)
2.दाड़े गे धोन (ड्रामा)
3.खेरवाल वीर (ड्रामा)
4.एलखा पोतोब (प्रथमिक गणित)
5.हितल (संथाली गीत)
6.रोनोर(संथाली व्याकरण )